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Religion & Spirituality• First Edition
गृहस्थ धर्म की संहिता
लोकगीता वह गीता है जो युद्धभूमि में नहीं, बल्कि रसोई, आँगन, खेत, कार्यक्षेत्र और परिवार के बीच प्रकट होती है और एक साधारण घर को धर्म, ध्यान, सेवा और संतुलन का आश्रम बना देती है। यह ग्रन्थ सिखाता है कि सन्तान पालन ही तप है, अन्न पकाना ही यज्ञ है, परिवार चलाना ही साधना है और गृहस्थ ही सबसे कठिन योगी है। लोकगीता भारतीय गृहस्थ जीवन के ध्यान, अनुशासन, प्रेम, त्याग, श्रम और सेवा को एक सूत्र में बाँधते हुए बताती है कि धर्म का अर्थ परिवार में ईश्वर का दर्शन करना है और साधना का अर्थ अपने कर्तव्यों को पूजा बना देना है। इस पुस्तक में गीता का गृहस्थ रूप, 18 गृहस्थ-धर्म सूत्र, आंतरिक शांति एवं निर्णय योग, रसोई-ध्यान और प्राणिक अन्न, परिवार-संस्कार एवं संतुलित जीवन, त्रिकाल स्मरण, संयम, स्वाध्याय, धन-धर्म संतुलन का मार्ग तथा धर्म, प्रेम, परिश्रम और परमार्थ की एकता का विस्तार मिलता है। यह ग्रन्थ संन्यासियों के लिए नहीं, बल्कि उन गृहस्थों के लिए है जो जिम्मेदारियों के बीच ईश्वर को पाना चाहते हैं, और यह स्पष्ट करता है कि मोक्ष घर के बाहर नहीं, बल्कि चरित्र, करुणा और कर्तव्य के भीतर ही निहित है। यह पुस्तक गृहस्थ साधकों, परिवार और समाज-केंद्रित लोगों, भक्ति और कर्मयोग के पथ पर चलने वालों, संस्कृति-प्रेमी युवाओं, आध्यात्मिक गृहिणियों और माता-पिता तथा जीवन में उत्तर खोज रहे कर्मशील लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, और अंततः जीवन को परिवर्तित करने वाला ऐसा व्यवहारिक आध्यात्म प्रस्तुत करती है जो घर को मंदिर और जीवन को साधना बना देता है।
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Author
Swami Sumananand Nath
“Jo Jiya Wahi Likha – Jo Likha Wahi Jiya” (Lived Wisdom. Written Truth.)
Length
182 Pages
Audience
Householders (Grihasthas) seeking spiritual growth amidst family and professional responsibilities; individuals interested in practical spirituality, Karma Yoga, and Bhakti Yoga; culture-loving youth; spiritual homemakers and parents; and those feeling overwhelmed in their careers seeking answers.
Publisher
Clever Fox Publishing
Publication Date
13 Oct 2025
Series
Grihastha Dharma & Life Philosophy · Book 2
Languages
Hindi
Reading Age
18+
ISBN-13
9789375001652
Item Weight
150 g
Dimensions
22.9 × 14.87 × 2 cm
Country of Origin
India
लोकगीता वह गीता है जो युद्धभूमि में नहीं, बल्कि रसोई, आँगन, खेत, कार्यक्षेत्र और परिवार के बीच प्रकट होती है और एक साधारण घर को धर्म, ध्यान, सेवा और संतुलन का आश्रम बना देती है। यह ग्रन्थ सिखाता है कि सन्तान पालन ही तप है, अन्न पकाना ही यज्ञ है, परिवार चलाना ही साधना है और गृहस्थ ही सबसे कठिन योगी है। लोकगीता भारतीय गृहस्थ जीवन के ध्यान, अनुशासन, प्रेम, त्याग, श्रम और सेवा को एक सूत्र में बाँधते हुए बताती है कि धर्म का अर्थ परिवार में ईश्वर का दर्शन करना है और साधना का अर्थ अपने कर्तव्यों को पूजा बना देना है। इस पुस्तक में गीता का गृहस्थ रूप, 18 गृहस्थ-धर्म सूत्र, आंतरिक शांति एवं निर्णय योग, रसोई-ध्यान और प्राणिक अन्न, परिवार-संस्कार एवं संतुलित जीवन, त्रिकाल स्मरण, संयम, स्वाध्याय, धन-धर्म संतुलन का मार्ग तथा धर्म, प्रेम, परिश्रम और परमार्थ की एकता का विस्तार मिलता है। यह ग्रन्थ संन्यासियों के लिए नहीं, बल्कि उन गृहस्थों के लिए है जो जिम्मेदारियों के बीच ईश्वर को पाना चाहते हैं, और यह स्पष्ट करता है कि मोक्ष घर के बाहर नहीं, बल्कि चरित्र, करुणा और कर्तव्य के भीतर ही निहित है। यह पुस्तक गृहस्थ साधकों, परिवार और समाज-केंद्रित लोगों, भक्ति और कर्मयोग के पथ पर चलने वालों, संस्कृति-प्रेमी युवाओं, आध्यात्मिक गृहिणियों और माता-पिता तथा जीवन में उत्तर खोज रहे कर्मशील लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, और अंततः जीवन को परिवर्तित करने वाला ऐसा व्यवहारिक आध्यात्म प्रस्तुत करती है जो घर को मंदिर और जीवन को साधना बना देता है।
Ask Book Advisor (Gemini)
What You'll Discover
गृहस्थ जीवन को ही सर्वोच्च साधना और योग के रूप में समझना
दैनिक कार्यों जैसे भोजन बनाना, परिवार पालन को यज्ञ और तप में रूपांतरित करना
धर्म को परिवार में ईश्वर-दर्शन और कर्तव्य-पालन के रूप में जीना
जीवन में संतुलन, अनुशासन और आंतरिक शांति के लिए व्यावहारिक मार्ग अपनाना
धन, प्रेम, परिश्रम और परमार्थ के समन्वय से समग्र जीवन जीना
“Jo Jiya Wahi Likha – Jo Likha Wahi Jiya” (Lived Wisdom. Written Truth.)
Dr. Suman Kumar Das, also known as Swami Sumananand Nath, is a visionary thinker, spiritual practitioner, and agripreneur with over three decades of diverse experience across business, research, and sadhana. After an international career spanning Central Asia and Russia, he returned to India with a deeper purpose—to integrate Vedic wisdom with modern science and create sustainable, consciousness-based living systems. He is the Founder-Peethacharya of Lalita Divyashram, a unique Mahavidya Siddha Peeth in Khajuraho, where spiritual practices, mantra research, and ecological innovations converge. Through his pioneering work in Mantra Yoga, Vibrational Healing, and Gau Krishi Vanijyam (cow-centric regenerative agriculture), he has guided thousands of seekers and practitioners toward holistic transformation. A prolific author of multiple books on spirituality, agriculture, health, and conscious living, Dr. Das combines experiential knowledge with scientific insight. His work bridges the gap between ancient traditions and modern needs, offering practical frameworks for health, prosperity, and inner awakening.
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